
सॉरी लेटर
माफ़ी सिर्फ़ “सॉरी” कह देने का नाम नहीं है।
उसके पीछे बहुत कुछ होता है—
वो बात, जिसे आप आज समझ पा रहे हैं, लेकिन तब नहीं समझे थे।
वो पछतावा, जो अब भी आपके भीतर घुट रहा है।
वो बात, जो कहनी तो थी, मगर कह नहीं पाए...क्योंकि वक़्त निकल गया, बहस ज़्यादा बढ़ गई,
या फिर ख़ामोशी आसान लगने लगी।
हमें बताइए, हुआ क्या था। हम सुनेंगे—सिर्फ़ आपकी बातें नहीं, उनके बीच छिपी वो बातें भी, जिन्हें आप शायद ठीक से कह नहीं पा रहे।
क्या किया था आपने। क्या अलग करना चाहिए था। क्या है जिसे आज भी वापस ले लेना चाहते हैं।
और अब आप चाहते हैं कि सामने वाला क्या जाने।
हम आपकी उस माफ़ी को शब्द देंगे—जो सिर्फ़ “मुझे माफ़ कर दो” न कहे,बल्कि यह भी कह पाए किआपको अपनी गलती क्यों समझ आई, उसके बाद आपने क्या जाना,और अब आप क्या ठीक करना चाहते हैं।
शब्दों में ही वो ताक़त है, जो किसी दरकते हुए रिश्ते को संभाल सकती है, संवार सकती है।
और अगर रिश्ता न भी संभले, तो कम से कम आपको उस घुटन से मुक्त कर सकती है, जिसे
आप इतने समय से भीतर लिए घूम रहे हैं।
आप हम पर भरोसा कर सकते हैं। आप जो कुछ हमारे साथ साझा करेंगे, वो हमारे बीच ही रहेगा—हमेशा।
एहसास आपके, अल्फ़ाज़ हमारे।
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