
ग्रेटिटयुड लेटर
दुनिया का दूसरा शब्द जो लगभग अपने मायने खो चुका है— 'थैंक यू'।
शायद इसलिए कि यह शब्द बहुत आम हो गया है।
बहुत casually प्रयोग किया जाता है, इतना कि न कहने वाले की ज़ुबान में ज़ायक़ा होता है और न सुनने वाले को देर तक याद रहता है।
समंदर से भी गहरा असर हो सकता है इस भाव का, बशर्ते इसमें थोड़ी-सी शब्दों की सलाहियत मिला दी जाए। क्योंकि कई बार शुक्रिया सिर्फ़ शुक्रिया नहीं होता।
किसी का हमें अपनी ज़िंदगी में जगह देना, बस में सीट ऑफ़र करने जैसा नहीं होता, जिसके लिए सिर्फ़ एक शुक्रिया काफ़ी हो।
जब सब हमारे ख़िलाफ़ थे, तब किसी का हमारे साथ खड़े रहना, सिर्फ़ एक शुक्रिया की अपेक्षा नहीं रखता।
हमें रोने के लिए कंधा देना,
हमारे आँसू पोंछना,
हमें गिरने से पहले थाम लेना,
हमारी ख़्वाहिश के लिए अपनी ज़रूरतों को दफ़्न कर लेना—
यक़ीन जानिए, इन सबके लिए सिर्फ़ एक शुक्रिया सचमुच नाकाफ़ी है।
कभी-कभी लड़ने के लिए भी
एक शुक्रिया काफ़ी नहीं होता।
याद कीजिए—जब कोई आपके लिए आपसे ही लड़ गया था।
क्या उस इंसान को बस एक शुक्रिया कहना काफ़ी है?
नहीं ना।
हमारा मानना भी यही है।
हम सोचते हैं कि कभी वक़्त आने पर हम उसके साथ की, उसकी बात की, उस एहसास की क़ीमत अपनी तरह से अदा करेंगे।
लेकिन कितनी बार हम बस सोचते ही रह जाते हैं…और वो वक़्त?
अच्छी बात ये है कि वो वक़्त आपके लिए आ गया है।
अगर आप इसे फिर एक बार मिस नहीं करना चाहते, तो फ़ोन उठाइए।
हमें कॉल कीजिए।
उस शख़्स से अपना रिश्ता बताइए।
वो पल बताइए, जिसे आप आज भी अपने भीतर सँजोए हुए हैं।
हम एहसासों को हर्फ़ों से तराशने का हुनर रखते हैं।
यक़ीन जानिए, एक-एक हर्फ़ किसी सच्चे मोती जैसा होगा।
हमें उम्मीद है, मोतियों का ये अनमोल उपहार आप अपने उस ख़ास रिश्ते को ज़रूर देना चाहेंगे।
इस बार कोई इंतज़ार नहीं।
है ना?
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