
प्रोपोज़ल लेटर
कहना तो बहुत कुछ है... बस समझ नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करें।
वो एक सवाल, जिसे आप न जाने कितनी बार मन ही मन पूछ चुके हैं—कभी अकेले में, कभी उनके सामने बैठकर, कभी रास्ते में, तो कभी रात को सोने से पहले।
लेकिन जब सचमुच कहने का वक़्त आता है, तो दिल की सारी बातें जैसे एक साथ उलझ जाती हैं।
हम आपकी उस उलझन को शब्द देंगे।
आप हमें बस अपनी कहानी बताइए—आप दोनों पहली बार कहाँ मिले, उसमें ऐसा क्या है जो आपको उनका बना देता है, कौन-सी याद आज भी चेहरे पर मुस्कान ले आती है, और क्यों आपको लगता है कि वही आपके लिए सबसे ख़ास हैं।
हम उन बिखरी हुई बातों को ऐसे अल्फ़ाज़ देंगे, जो सिर्फ़ उन्हें प्रपोज़ न करें, बल्कि यह भी महसूस कराएँ कि आपने उन्हें ही क्यों चुना है।
क्योंकि कुछ सवाल पूछे नहीं जाते... उन्हें दिल से कहा जाता है!
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